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पारस्परिक स्वागत

दो ग्रह एक-दूसरे की राशियों में सहयोग का सृजन कर रहे हैं।

पारस्परिक स्वागत तब होता है जब दो ग्रह राशियों की अदला-बदली करते हैं। यह एक सहकारी आदान-प्रदान बनाता है जो कठिनाइयों को कम कर सकता है या उन ग्रहों के बीच टीम वर्क को मजबूत कर सकता है।

उदाहरण

यदि मंगल तुला राशि में है (शुक्र द्वारा शासित) और शुक्र मेष राशि में है (मंगल द्वारा शासित है), तो वे परस्पर स्वागत में हैं - प्रत्येक ग्रह दूसरे की मेजबानी करता है, एक सहकारी आदान-प्रदान बनाता है जो मंगल के नुकसान को कम करता है।

सांस्कृतिक संदर्भ

पारस्परिक स्वागत ग्रहों के बीच एक 'राजनयिक आदान-प्रदान' बनाता है - प्रत्येक ग्रह की कुछ अन्य ज़रूरतें होती हैं। कुछ ज्योतिषी आपसी स्वागत को ऐसे पढ़ते हैं मानो ग्रह युति में हों; अन्य लोग इसे केवल एक सहायक रिश्ते के रूप में देखते हैं। यह तकनीक मध्यकालीन अरबी ज्योतिष से मिलती जुलती है।

प्रसिद्ध उदाहरण

फ्रीडा काहलो का चंद्रमा वृषभ राशि में (शुक्र द्वारा शासित) और शुक्र मिथुन राशि में (बुध द्वारा शासित) था। हालांकि पारंपरिक पारस्परिक स्वागत नहीं, यह श्रृंखला दिखाती है कि शासकत्व ग्रहों के बीच सहयोग कैसे बनाता है - उसकी भावनात्मक प्रकृति (चंद्रमा) उसकी कलात्मक अभिव्यक्ति (शुक्र) से जुड़ी हुई है।

क्या आप जानते हैं?

जिस ग्रह को नुकसान पहुंचता है या गिरता है, जिसका पारस्परिक स्वागत होता है, उसे 'बचाया' माना जाता है - इसका एक मित्र उच्च स्थान पर होता है। तुला राशि में मंगल (नुकसान) मेष राशि में शुक्र के साथ परस्पर स्वागत पैदा करता है, जिससे मंगल की कठिनाई कम हो जाती है। पारंपरिक ज्योतिषियों ने इन 'बचने की युक्तियों' को बहुत महत्व दिया।

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ज्योतिष में पारस्परिक स्वागत क्या है? अर्थ और परिभाषा